“वीर जाँबाज़ ज़ुदा है सबसे”…

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हिंद के सर-ज़मीं के वीर जाँबाज़ ज़ुदा है सबसे ।
वतन पे मिटने वालों का अंदाज़ ज़ुदा है सबसे ।।
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न अपने तन की फिकर और न ही करे धन की फिकर ,
अपने लहू से सींचकर सिर्फ़ करते वतन की फिकर ।
ज़ोश-ए-ज़ुनून का अद्भुत आग़ाज़ ज़ुदा है सबसे ,
वतन पे मिटने वालों का अंदाज़ ज़ुदा है सबसे ।।
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लफ़्ज़ों की बात हो तो इनका है तिरंगा से कहना ,
शान सदा बनी रहेगी , चाहे पड़े कुछ भी सहना ।
मातृभूमि को समर्पित ये अल्फ़ाज़ ज़ुदा है सबसे ,
वतन पे मिटने वालों का अंदाज़ ज़ुदा है सबसे ।।
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इनकी शहादत केवल हर किसी के सक़ून के नाम ,
गर्व से सीना चौड़ा होता देख अपना अंज़ाम ।
वतन से इस कदर इश्क़ का आवाज़ ज़ुदा है सबसे ,
वतन पे मिटने वालों का अंदाज़ ज़ुदा है सबसे ।।
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ये कुछ भी न तौलते और जां-निसार कर जाते हैं ,
अपनी शहादत दे वतन से अमिट प्यार जताते हैं ।
सबके दिलों में बसते ये सरताज़ ज़ुदा है सबसे ,
वतन पे मिटने वालों का अंदाज़ ज़ुदा है सबसे ।।
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क़ाश वतन के लिए जीने का ज़ज़्बा सबको आ जाये ,
रग़ों का खूं , खूं होगा ग़र किसी के काम आ पाये ।
वीर शहीदों के शहादत का काज ज़ुदा है सबसे ,
वतन पे मिटने वालों का अंदाज़ ज़ुदा है सबसे ।।
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हिंद के सर-ज़मीं के वीर जाँबाज़ ज़ुदा है सबसे ।
वतन पे मिटने वालों का अंदाज़ ज़ुदा है सबसे ।।
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— °•K.S. PATEL•°
( 25/02/2019 )

         

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