सहर्ष वंदम अपराजेय अजय,

अहा! आनंदम आनंदम, सहर्ष वंदम अपराजेय अजय,
जाग्रत अखंड भारत तीन रंगों में चमक रहा चमचम।
राष्ट्र प्रेम और देश भक्ति का हो रहा उद्घोष ऊर्जस्वित,
सबसे ऊपर विश्व शिखर पर लहरा रहा हमारा परचम।

आज भारत मना रहा है उल्लास पूर्व स्वतंत्रता दिवस ।
नहीं अधीन अब हम किसी के हैं फिर भी हम विवश।
बहन बेटियां नहीं सुरक्षित,करतीं रहती नित नव संघर्ष।
संवेदना है खत्म हो गई, करते रहते बस विचार विमर्श।
सविनय अवज्ञा नित्य होती,अहिंसा करती नित नव संघर्ष।

हर्ष पर्व पर ही दिखता है, संपूर्ण देश में मानों अचानक,
ऊर्जस्वित असीम अनुकम्पा का उद्दाम ज्वार उठता है।
फेसबुक और व्हाट्स ऐप पर जय हिन्द,वन्दे मातरम के महामंत्र का महामृत्युंजय सा उच्चार हुंकार उठता है।

अनन्य शहीद बोर्डर सीमा पर प्राणभेंट कर शहीद हो जाते।
भारत में रहकर कुछ शरारती तत्व भारत को हैंसेंध लगाते।
मासूम बचपन और युवा बुजुर्ग हैं सबको ही निशाना बनाते।
सभी स्वाधीनता सेनानियों शहीदों को न जाने क्यों भुलाते।

नीलम शर्मा

         

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