मुहब्बत और नफ़रत

तुम्हें क्या लगता है.. वो बातें बनायेगी तो वो आँख बंद करके उन बातों पर शर्म से मुस्कुरायेगा?
– लगने का तो पता नहीं.. लेकिन होना तो कुछ ऐसा ही चाहिए।
तो तुम ग़लत सोचती हो.. वो किसी के बातों पर थमकर मुस्कुराता नहीं है।
– तो क्या करता है?
उसे नहीं पता होता है वो क्या करता है.. पुरखों की चली आ रही दुश्मनी में वो ये नहीं सोचता कि सामने जो खड़ा है.. वो उसके बाप के बराबर का है भी या नहीं। वो तो बस वही करता है जिसे उसकी ट्रेनिंग मिली हुई है।
– ट्रेनिंग में क्या मिला है उसे?
ट्रेनिंग में उसे पुश्तैनी पिस्तौल मिली है और साथ-साथ ये हुक़्म भी मिला है कि दुश्मन जहाँ मिले.. सीने के पास ले जाकर पिस्तौल चला देना।
– सीने से लगाकर क्यूं?
क्योंकि इससे पहले 6 इंच दूर से गोली मारी थी उसके अब्बा ने.. कमबख़्त जाने कैसे बच गया था वो? उसे ट्रेनिंग में मुहब्बत से नफ़रत पाली हुयी मिली है।
– ये कौन लोग हैं यार! जो अपने बच्चों की मुहब्बत में नफ़रत पाल देते हैं? अपनी लड़ाई की आग में अपने बच्चों को क़ुर्बान कर देते हैं?
ये ना पूछो कि ये कौन लोग हैं? ये लोग हैं ही ऐसे.. ये समझो अगर इनसे मुहब्बत हो जाये तो जान हथेली पर लेकर घूमना होता है। पता ना कब किस ओर से कोई गोली निकलकर आ जाये और नजाने कौन कब किसकी जान ले लें?
– अरे! तो जाकर फिर उनको बताओ कि जो किसी की जान ले लेते हैं ना.. तो फिर वो उन्हें मरके भी जीने नहीं देता। किसी की जान लेकर जीओ ना तो जिया नहीं जाता.. साँसें लो तो लगता हैं जैसे कि कोई बची हुई साँसें छीन रहा है।
वो ये सब जानता है और तुम ये सुनोगी तो हैरान हो जाओगी कि वो जवाबन क्या कहता है?
– क्या कहता है जवाबन?
कहता है दुश्मनी तो उसकी अब्बा से थी लेकिन ख़ून उसने मेरा किया था। मेरी अम्मी ने मुझे इसलिये नहीं पाला कि जब मैं 27 का हो जाऊँ तो एक लड़की को देखूँ.. और देखते ही सोच लूँ कि मैं तो इसपर मरने के लिये पैदा हुआ हूँ। कहता है ये समझ लो जब आशिक़ बर्बाद हो जाता हैं ना तब वो आज़ाद हो जाता है.. बस उसे क़रार नहीं मिलता।
– तो उससे जब आइंदा मिलो तो कहना ज़ुर्म करने वालों को क़रार कभी नहीं मिलता। ये अल्लाह की देन हैं.. ये तो सिर्फ़ उन्हें मिलता है जो साई लोग होते हैं.. जब वो भी साई लोग हो जायेगा ना तो फिर कोई गोली उसे भी नहीं मार पायेगी।
तो जब वो ये पूछेगा कि उसकी मुहब्बत का क्या हुआ तो मैं क्या कहूँ?
– तुमने ही तो कहा था कि उसने उससे कहा था कि- ” तुमसे मुहब्बत हो गयी है.. लेकिन इकरार उस रोज़ करूँगा जिस दिन दुश्मन के सीने में गोली उतार दूँगा। ”
और वो मान जायेगी?
– इकरार करेगा तो शायद मान जायेगी।
और ना मानी तो?
– तो उससे कहना इसरार करें.. मुहब्बत में बाज़ियाँ भी बहुत होती हैं।
और तब तक उसने उसका इंतज़ार ना किया तो.. वो तो बोलता है जाओ पूछकर आओ- मुहब्बत देने का क्या लोगी?
– हाहाहा.. उससे ये ना पूछना क़ीमत सुनकर उसकी जान निकल जायेगी.. वो उसकी मुहब्बत ख़रीद लें.. उसकी इतनी औक़ात नहीं।
क्या बात करती हो? वो चाहे तो पूरा शहर ख़रीद ले.. मुहब्बत चीज़ ही क्या है?
– तुम क़ीमत सुनो.. और सुनकर बताओ.. क्या ये कर गुज़रने की हैसियत है उसकी?
तुम दाम बोलो बस।
– वो अपनी मुहब्बत के बदले उसके दुश्मन की जान माँगेगी।
वो कौन लगता है उसका जिसके लिये वो उसकी जान का सौदा करेगी?
– वो कोई नहीं लगता.. लेकिन जो सब कुछ लगता है.. उसे वो कुछ होने देना नहीं चाहती।
तो उससे कहना सौदा नहीं हो पायेगा.. वो कभी नहीं मानेगा ये बात।
– फिर उससे कहना भूल जाये उसे।
और उसका दिल.. उसके दिल का क्या होगा?
– जिस लड़के का दिल किसी के ख़ून का प्यासा हो.. उस लड़के का दिल फिर किसी लड़की के काम नहीं आता। भूल जाये तो बेहतर है या गुमशुदा होकर जी ले.. वो नहीं चाहती कि उसके बच्चों का बाप जेल में हो और उसके बच्चे अपने बाप की अधूरी नफ़रत भरी लड़ाई को पूरा करने की कोशिश में भिड़े हो।

         

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