कागज़ की नाव

चले आओ सभी मिलकर
बनाएं नाव कागज की ।।

हुई बरसात है कितनी
गली में भर गया पानी ,
सुनो राजू , सुनो  मन्नू ,
सुनो तो राधिका , रानी ।

इसी पानी मे तैरायें
हमारी नाव कागज की ।।

रखी है मेज  पर  कॉपी
चलो पन्ने  निकालें  हम ,
मगर  ठहरो  जरा  बाबा
की नजरों से बचा लें हम ।

इन्हीं पन्नों से अब लाओ
बनायें नाव कागज की ।।

इसे अब धार में डालें
बहुत ही दूर जायेगी ,
रुको पकड़ो नहीं इसको
ये वरना डूब जायेगी ।

टपकती बूँद से आओ
बचायें नाव कागज की ।।
********डॉ. रंजना वर्मा

         

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