माइकल फेराडे

* माइकल फेराडे*

एक अनाथ बालक था। वहलंदन के घुड़साल में रहता था।कभी वह पेट भरने के लिए अखबार बेचता तो कभी तरह तरह के दूसरे काम करता। अखबार बेचते बेचते उसे पढ़ने का शौंक लग गया। फिर 13 साल की आयु में वह एक जिल्दसाज़ के यहाँ नौकरी करने लगा।उसमें पढ़ने की बहुत ललक थी। एक दिन ‘एनसायक्लोपीडिया’ पर जिल्द चढाते समयउसकी नजर बिजली के बारे में एक लेख पर पड़ी। उसने उस लेख को कई बार पढा, और छोटी छोटी चीजें जुटा कर प्रयोग करने आरम्भ कर दिए । एक दिन एक सज्जन ने उसे इस तरह प्रयोग करते देखा तो वे उसे सर हम्फ्री डेवी का भाषण सुनाने ले गए। उल बालक ने डेवी के भाषणों के नोट्स लिये,और उन पर अपनी टिप्पणियां लिखीं व सर डेवी के पास भेज दिया।सर डेवी उसकी टिप्पणियों से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने उसको अपने यंत्रों की देखभाल के लिये रख लिया।वह सर डेवी के प्रयोग देखता और धीरे धीरे विग्यान में अपनी रूचि के चलते ही वह एक बडी एकादमी में अध्यापक नियुक्त किया गया। ये बालक माइकल फेराडे था जिसने आगे चल कर विग्यान की दुनिया में कई चमत्कार किये।
—-राजश्री—

         

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