डिजिटल लव

फेसबुकिया प्यार……
मालिनी एक ऐसा चरित्र है जिसे शायद दूसरों का सोचने के लिए ही बनाया है भगवान ने। मैंने उसे कितनी बार समझाया कि अपने लिए भी तो जियो,पर एक अजीब सी रहस्यमय मुस्कान के साथ वह मुझे टाल जाती है।व्यक्तिगत जीवन की अगर बात करें तो,वो दिखाती तो है कि बहुत खुश हैं मगर उसका जीवन इसके विपरीत है। कारण ससुराल और जीवन साथी से मिला धोखा, जिसके साथ वह अभी भी रह रही है और हर पल नयी आस लिए कि पति सुधरेगा अंधविश्वास में जिये जा रही है।विजय उसका पति छलावों की अति कहना ग़लत न होगा।21 वर्ष हो गए हैं उनकी शादी को।वैसे तो मां शब्द अपने आप में अतुल्य है, अच्छा तो नहीं लगता कहते हुए किंतु विजय की मां और भाभी ही मालिनी के जीवन को नर्क बनाने के लिए पूर्णतः जि़म्मेदार हैं।वो एक कहावत भी है न-“चोर क के मारे, चोर की मां के मारे।” उन दोनों की वजह से विजय मालिनी को छोड़कर भी चला गया था, जिंदा लाश की तरह घूमती थी मालिनी।पहले सिर्फ़ सुना था किंतु मैंने उसे खून के आँसु रोते देखा था, उसे महसूस किया था।फिर भी अपने बहन भाई, माता पिता व कुछ मित्रों के साथ से वह अकेली रही, पिता के घर न जाकर अकेले रहकर परिस्थितियों का सामना किया, अपनी मेहनत से उसे एक नामी संस्था मैं नौकरी भी मिल गई।अभी वह अपने 10-11 वर्ष के बेटे के साथ हालात से लड़ते हुए जी ही रही थी कि उसका पति विजय दो ढाई साल के बाद उस पर अहसान जताते हुए उसके जीवन में वापस आ गया।सबने कहा मर्द है अपनी इगो सेटिस्फेक्शन के लिए वो तुम पर अहसान जता रहा है किंतु अंदर से अपनी गलतियों का अहसास ज़रूर होगा, इसलिए जो कहता है मानलो।मालिनी भी उसके बिना जीना नहीं चाहती थी और बेटा क्यों बाप के प्यार से वंचित रहे,तो दोनों साथ रहने लगे।कमाऊ पत्नी होने के बाद भी वह विजय पर निर्भर थी, है और वह दोबारा न भागा तो रहेगी भी ऐसी ही है मालिनी।अभी एक वर्ष भी न हुआ था विजय फिर से अपनी हरकतों पर आ गया,डिवोर्स की धमकियां देने लगा, उसे उसकी फैमिली से ट्रेनिंग जो मिल रही थी।खैर कोई नहीं रोकर जीने की आदत हो गई थी उसे, मैं बहुत समझाती पर वो जैसे बुद्धि से काम लेना ही भूल गई थी।लड़ते झगड़ते काफी समय निकल गया।अचानक पति की अय्याशियों का पूरा का पूरा पुलिंदा बाहर आ गया, विजय अभी भी उसे बहला फुसला रहा था नहीं ऐसा कुछ नहीं है तुम्हारी सोच ऐसी है।वह नहीं जानता था कि मालिनी के हाथ पक्के सबूत लग गए हैं, इसलिए मालिनी के साथ बैठकर ही इस ग़लत फहमी में कि वह नहीं देख रही, अपनी गर्ल फ्रेंड को I Love you. का मैसेज लिखता। मालिनी सब जानते बूझते चुप रही और मौका मिलते ही बिलख उठती समय बे समय,हालत खराब थी उसकी। मैंने उसे जीवन में आगे बढ़ने को कहा और सच पूछो तो एक बार हम दोनों ही घबरा गये थे कि कहीं मालिनी किसी गलत संपर्क में न आ जाए क्योंकि आज वह जिस परिस्थिति और मानसिक तनाव को झेल रही है उसमें कोई भी पुरुष यदि झूठे ही या मज़ाक में उसे प्रेम की बात करे तो वो पिघल जाएगी। अब वह खुद को ज्यादा से ज्यादा व्यस्त करना चाहने लगी कि एक दिन उसने खाली बैठे बैठे मैसेंजर का इनबॉक्स चैक किया तो पाया अनगिनत हेल्लो हाय के मैसेज पिछले दो-तीन साल से बार बार आए हुए थे,मिस्ड विडियो काल,वाइस काल उसे लगा अरे इतने मित्र और उसने किसी को भी उत्तर नहीं दिया,सब उसे रूड समझ रहे होंगे।ऐसा सोच कर उसने कुछ को 🙏🙏 सिंबल्स भेज दिए।अब तो सिलसिला ही अलग शुरू हो गया।एक जनाब ने तो मालिनी की प्रशंसा में मानों रोमांटिक शायरी ही लिखनी शुरू कर दी, मालिनी उसे कुछ भी न जताकर हँसकर टालने लगी मगर उसे अच्छा लग रहा था वो सब किंतु अपने स्वभाव के विपरीत भी। विवाह से पहले उसकी सखियां उसका मज़ाक उड़ाती थी कि वह सब को भाई बना लेती है, किसी को उस पर लाइन मारने का मौका नहीं देती,मालीनी हंस कर कहती I am one man woman. मैं जिससे शादी करुंगी उसी से प्यार करुंगी।
वो उसे छेड़ती कि जब तुम्हें शादी के लिए कोई देखने आएगा न तो तुम उसे भी भाई न बना लेना 😜।पर मालिनी का कोई बड़ा भाई नहीं था,वो इसलिए ऐसा करती थी ऊपर से उस समय भाई-बहन के पवित्र रिश्ते पर मूवीज़ भी बहुत आती थीं, जिनका उस पर बहुत प्रभाव था और उसके भाई भी इतने थे कि कोई उसे प्रपोज करने की सोचता तो ही पिट जाता था। बहरहाल अब शायद परिस्थिति वश वह बदल रही थी, उसनेे इन सब से बचने के लिए अपनी प्रोफाइल पिक्चर भी विजय के साथ लगाई पर न जाने कहां से फेसबुकिया फेंक देवदास अवतरित होने लगे और वो उन्हें सिरियस लेने लगी। मुझसे कहा भी कि अगर मुझे कोई दोबारा धोखा न दे तो शायद मैं विजय को भुला पाऊं। मैंने उसे प्रेरित तो कर दिया था किन्तु अब मुझे डर था कि कहीं ये भावनाओं में आकर बहक न जाए और ऐसा हुआ तो ये मर जाएगी, मैं रोकना चाहती थी पर उसको कभी कभी खुश देखकर मैं ये सोचकर चुप रह जाती कि नहीं अगर ऐसा कुछ हुआ तो हम मिलकर संभाल लेंगे उसे, आखिर विजय भी तो पता नहीं कितने रिश्ते लेकर एंजॉय कर रहा है।खैर मालिनी ने मुझे बताया कि उसे वो तथाकथित अच्छा लगने लगा है किंतु विजय के स्पर्श से ही वह दीवानी हो जाती है।हम दोनों किसी निष्कर्ष पर नहीं पंहुच पा रहे थे।तभी उसे पता चला कि वह उससे उम्र में बहुत छोटा है उसके छोटे भाई की उम्र का और उस की आत्मा उसे धिक्कारने लगी,उसने जब उस लड़के से पूछा तो उसने कहा वो टाइम पास कर रहा था, पर मालिनी के समझाने पर अब वह मालिनी को दीदी कहने लगा।बाकि के बारे में बोली कि मैं किसी और की लाइफ में अपनी वजह से विजय रूपी पति नहीं बनने दूँगी।अब जैसे मालिनी के पास हर रोज ही किसी न किसी के फोन आने लगे पर उसने खुद को बड़ी ही मजबूती से समेटा और जिसका भी फोन आता उसे आड़े हाथों लेती।अब तो मैं भी उसे कोई सलाह देने से घबराती हूँ। वो कहती है ये जन्म तो गया और आगे मैं जन्म लूँगी नहीं।ओओहो……!!! सचमुच अब तो हम दोनों उन बातों पर हँसलेते हैं पर वो समय हम दोनों बल्कि मालिनी के लिए बहुत ही तनाव वाला था।
नीलम शर्मा ✍️

         

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