अंधकार और प्रकाश

अंधकार एक बार प्रभु के पास सूर्य के प्रति शिकायत लेकर पहुंचा और कहा ” प्रभु ,,कृपया सूर्य को समझाएं , इसने मेरा जीवन दूभर कर दिया है तथा इसके कारण मेरा अस्तित्व खतरे में पड़ गया है ।”
प्रभु ने सूर्य को संदेश भिजवाया तथा अंधकार की शिकायत के बारे में कहा ,सूर्य ने इस शिकायत को सुनकर प्रभु से कहा ” मैं स्वयं आकर इस शिकायतकर्ता से मिलना चाहूंगा । क्योंकि मैंने आज तक जानते बूझते हुए किसी को भी दुख पहुँचाने का कार्य नहीं किया , मुझे तो यह भी पता नहीं कि यह अंधकार कौन है तो मैं उसे कैसे नुकसान पहुँचा रहा हूँ ? मैं चाहता हूं कि आप उन्हें मेरे सामने बुलाए ताकि मैं अपने द्वारा अनजाने में किए गए अपराध की माफी मांग सकूँ ।”
कहते हैं प्रभु और सूर्य ने सदियों अंधकार का इंतजार किया लेकिन वह उनके सामने कभी उपस्थित ही नहीं हो सका ।
जिस तरह अंधकार , प्रकाश के अभाव का नाम है उसी तरह हमारे जीवन में अधिकांश समस्याएँ नए और उचित विचारों के अभाव से उत्पन्न होती हैं यदि हम अपना मानसिक स्तर मजबूत करें तो हमें इन समस्याओं का समाधान अवश्य मिल सकता है बहुत बार हमारे जीवन में ऐसे लोग और ऐसी परिस्थितियाँ सामने आती है जिनके कारण हमारा मनोबल गिर जाता है पर उससे अपने आप को न टूटने देते हुए, जितनी बार हमारा मनोबल गिरता है उतनी ही बार हमें उसे संभालने की और बढ़ाने की जरूरत है ।
जिस प्रकार अंधकार प्रकाश के सामने नही टिक सकता उसी प्रकार समस्याएँ भी हमारे दृढ़ निश्चय और मजबूत मनोबल के सामने परास्त होती चली जाती हैं ।
क्योंकि गिर कर जो संभल जाता है वही मंजिल तक पहुँचता है और जो ऐसा नहीं कर पाता वह महज रास्ते का पत्थर बन कर रह जाता है ।

★वन्दना★

         

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