बरसात व बीमारियां

बरसता पानी- कैसे रहे स्वस्थ जीवन
सुन्दर विषय मोसंम के अनुकूल
तेज गर्मी में शीतलता के विभिन्न उपाय कम पड़ते हैं
कूलर बहुतायत से उपयोग किये जाते , साथ ही गर्मी से बचाव के लिए घर में पानी रखने के विशाल काय बरतन भी रहते है , हरीतिमा कुछ गर्मी शांत करे इस सोच से घर के किचन गार्डन में विभिन्न पौधों का रोपण भी होता जिसमे मणि प्लांट या शो पीस वाले पौधे भी लगाये जाते हैं ।जिन्हें देख ,जहाँ मन शांत होता है वहीं उन पौधों के संश्लेषण प्रक्रिया से भी कुछ नमी वातावरण को शीतलता ,नमी प्रदान करते हैं जिनसे गर्मी की तपन कुछ हद तक कम हो जाती है , किंतु बारिश का आगमन अपने साथ सोंधी मिट्टी के मोहक सुगंन्ध से शुरू फिर,,,,,,,,,,
चहुँ ओर,,,
कीचड,जहरीले ,अनचाहे कीट पतंगों के उत्पात नजर आते है
जिनमे मच्छर, मक्खी,लगभग सर्वत्र ही पाये जाते हैं
जो विभिन्न रोगों को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
मक्खी भोजन को दूषित कर आंत्र शोथ, पीलिया जैसे रोग के कीटाणुओं का प्रसार करते हैं।
जिनसे बचने हेतु यथा संभ भोजन ढक कर व् ताज़ी ही सेवन किया जाना चाही।
पानी उबालकर छान कर या फ़िल्टर, ओ आर ओ के उपयोग किये जाने चाहिए।
वहीँ कुछ खतरनाक जान लेवा रोग जिनसे मानव सदियों से आक्रांत है ,के प्रसार में हमारे घरों में रहने वाला,या घर के आस पास उनके रहने, प्रजनन के साधन बहुतायत से होने के कारण ,जिसे हम स्वयं जाने अनजाने पश्रय दिये रहते हैं वह मच्छड़ ही है ।
जो भारत में मुख्य तीन प्रजाति का पाया जाता है।
1 एनाफिलीज,
2 एडिस एजिप्टाई
व 3 कुलेक्स फेटिगन
ये तीनो बड़े ही ढीठ प्रव्रित्ति के सुरीली तान देने वाले विभिन्न रोगों के वाहक हैं।
जिनमे 1एनाफिलीज मलेरिया रोग का संचरण करता है ये शाम को हलके धूप में साफ पानी में अंडे देकर घर की ओर मुखातिब होता है,संध्या,रात्रि में मनुष्यों को गाना सुनाते हुए खून चूसता है।
2 एडिस एजिप्टाई ये दिन में मस्ती करते चहल पहल वातावरण पसंद करता है, ये भी साफ पानी में अंडे देता है ,जो हमारे घरों में विशेष कर बच्चो के खिलौने,टूटे फूटे बरतन जिनका उपयोग काफी दिनों से नहीं हो रहे,घर के कूलर जिनका पानी आलस वश हम नहीं कर पाते, ओर पुराने टायर आदि जो अमुपयोगी होने के बाद भी बड़े ही जतन के साथ छत में फेंक दिया जाता है, क्या सोच होगा इस टायर को रखने का? ,😢
एडिस एजिप्टाई मच्छर चिकन गुनिया, ड़ेंगू जैसे वायरल रोग के वाहक हैं जो जरा सी लापरवाही करने से प्राणों को संकट में डाल देते हैं
3 कुलेक्स ये फायलेरिया के कृमि को लेकर मनुष्य के खून का सेवन करने उपरांत रात्रि में ही उपहार प्रदान करते हैं।
फायलेरिया जो लगभग 4 से 10 वर्षो में अपने विकृति शरीर में दिखलाती है, पर जिनके शरीर में फायलेरिया के क्रीमी प्रवेश कर लेते है उन्हें साल में कम से कम तीन से चार बार वायरल बुखार ,सर्दी खांसी के लक्षण होते हैं जो बिना किसी उपचार के भी ठीक हो जाते है ,और यही लापरवाही होती है।
जो आगे शारीरिक विकृति में तब्दील हो जाती है।
हम जरा ड़ेंगू पर और चर्चा करें
इस मोसंम में सारा देश , राजधानी दिल्ली भी ड़ेंगू के प्रकोप से आक्रांत है।
ड़ेंगू के मच्छर दिन में काटते हैं
सामान्य लक्षण सर्दी खांसी, हाथ पैर में दर्द और बुखार जो कि दवा खाने से उतर जाता है
इसी में आंख की पुतलियों में भी दर्द होता है।
ऐसी स्थिति में मरीज को चिकित्सक की सलाह से पैरासिटामोल और ओ आर एस का घोल पर्याप्त मात्रा में सेवन करना चाहिए।
क्या होता है,, जैसे ही बुखार शरीर में चढ़ता है मुँह का स्वाद बिगड़ जाता है, जिससे भोजन बंद,
यही लापरवाही होती है।
साथ ही हरारत और बुखार में भी अपने कार्य अनवरत करते रहते हैं ,यही जानलेवा असर उत्पन्न करता है।
सुपाच्य भोजन के साथ पर्याप्त आराम करना चाहिए।
तो बताईये आप में से कितने?
इन मच्छरों को पॉले है या आश्रयदाता है।
क्या आप?,
अपने घर के कूलर को पूर्ण रूप से साफ़ किये
ए सी वालो से सवाल जहाँ पर ए सी का पानी गिरता है उसे सुखाने का क्या इंतजाम किये।
ये वही मच्छर है जो
विश्व विजेता सिकंदर को परलोक भेजा
तो बताये कौन है जो जीता वो?
, डॉक्टर सिटीजन एप दावुन लोड करें मलेरिया ड़ेंगू मिटाने में अपना योगदान करें ।
नवीन,,,

         

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