सोशल मीडिया पर भ्रामक संमचार

*सोसल मीडिया पर बगैर ठोस सबूत के समाचार जारी करना– कितना उचित?*
कल दिन भर एक दुखद समाचार ने सोशल मीडिया पर काफी सुर्खी बटोरी थी ।
कई उस समाचार प्रदाता के समाचार पर विश्वास कर ?
श्रद्धांजलि भी दे दिए।
ऐसी घटना अभी कुछ दिन पूर्व एक मीडिया चैनल ने भी जारी कर दी थी जिसमे पूर्व प्रधान मंत्री को लंबी बीमारी के बाद ?
ऐसे भ्रामक समाचार कैसे फैलते है।
कभी कभी तो हम अपने दिए श्रद्दांजलि के लिए हास्य के पात्र भी बन जाते है।
पर ऐसे समाचार लगातार वाट्स एप, फेसबुक, ट्वीटर पर अपना स्थान सुरक्षित रख सुर्खियों में है।
जिसका न सर है नही पुंछ
पर सोशल मीडिया में तैरते रहता।
*दुर्घटना की समाचार*
इस प्रकार के भी भ्रामक समाचारों की बाढ़ सोशल साइट्स पर नजर आती है।
कई समाचार तो काफी पुरानी होती जिनका नव तिथि निर्धारण कर *संमचार प्रदाता*
अपने होशियारी पर मंद मंद मुस्कुराता दुसरो के बेवकूफी का जश्न मनाता है।
*इन प्रवृत्ति पर रोक की बात जहाँ की जाये , वही मूल अधिकार का दखल शुरू और*
*अभिव्यक्ति के अधिकार पर लगाम*
का विरोध भी ,
पर समाचार की बिना विश्वसनीयता के कैसे गलत संमचार प्रेषित की जा रही।
जो संमचार प्रेषित कर रहा
क्या वह सचमुच लोगो के हीत का ध्यान रख रहा या उसकी सोच ?
सिर्फ सनसनी फैलाना ।
कल जो संमचार। पद्मश्री डॉक्टर तीजन बाई जी के बारे में फैली वह सिरे से ही निराधार थी, हाँ वे अस्पताल में गहन चिकित्सा इकाई में सीने में दर्द के चलते उपचार करा रही थी, स्थिति सामान्य होने पर उन्हें सामान्य वार्ड में रखा गया है, जब उन्हें उनके बारे में इस समाचार की जानकारी दी गई वे ठिठोली करते , कह गयी ये देख लो जी हम तो जिन्दा हसत बोलत तोर संग गोठियात हावन
अब हम भुत प्रेत तो ?
हहहह वातावरण में हास्य गुंजाये मान
नवीन कुमार तिवारी,

         

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