गुरु वंदना

3 महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को लगभग 3000 ईसा पूर्व में हुआ था। उनके सम्मान में ही हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है। वेद, उपनिषद और पुराणों का प्रणयन करने वाले वेद व्यास जी को समस्त मानव जाति का गुरु माना जाता है। बहुत से लोग इस दिन व्यास जी के चित्र का पूजन और उनके द्वारा रचित ग्रंथों का अध्ययन करते हैं। बहुत से मठों और आश्रमों में लोग ब्रह्मलीन संतों की मूर्ति या समाधी की पूजा करते हैं। वेदों के विस्तार के कारण ये वेदव्यास के नाम से जाने जाते हैं। वेद व्यास ने चारो वेदों के विस्तार के साथ-साथ 18 महापुराणों तथा ब्रह्मसूत्र का भी प्रणयन किया। महर्षि वेदव्यास महाभारत के रचयिता हैं, बल्कि वह उन घटनाओ के भी साक्षी रहे हैं जो घटित हुई हैं। हम भी अपने प्रभु शिव और माँ पार्वती को गुरु मानते है,जो सही दिशा और मार्ग-दर्शक बन मुश्किलों से निकालते हैं| हम फिर अपने घर के बडों बुढो को आदर देते है| हम फिर उन गुरुओं को नमन करते जो हमे सही राह सही सोच और सही कदम के लिये बढ़ावा देते है|हम ह्रदय से हमेशा उनका आदर करते है| जब भी हम कोई रचना लिखते उनकी बताए बाते और आदर्श हमारे सामने शिक्षाप्रद रूप में आ जाते हैं|कुछ पक्तियाँ आपकी-
गुरुवर बड़ी सोच और दूर-दृष्टि
कृपा जिस पल है मिलती
आगे बढने की आशा खिलती.
ज्ञान मिलता रहे बस हमेशा
यही आशीर्वाद का निवेदन करते हैं |
रेखा मोहन २७/७/१८

         

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