दर्द

आज सुबह से ही मन कुछ खराब सा हो रहा था,कुछ अच्छा नही लग रहा था।बार बार कल वाली बात न चाहते हुए भी याद आ रही थी ।मेरी तबियत खराब हो रह थी डॉक्टर ने कुछ इंजेक्शन ओर ड्रिप चढ़ाने के लिये कहा पास में ही एक नर्स थी उसे घर पर बुलाया ।वो हमारे परिवार को बहुत अच्छे से जानती थी । वो और मेरे पिताजी एक ही हॉस्पिटल में कार्यरत थे तो आपस मे बातचीत होती थी ।मेरे पापा हम पांच बहने थीं पर हमें बहुत प्यार करते थे । आज पापा तो नही रहे लेकिन मां है बचपन से ही मां के स्नेह से वंचित रही ,मां हमेशा मुझ से उखड़ी रहती थी पर मुझे ये बात कभी समझ नही आई कि क्यू उखड़ी रहती थी आज जब उस ने नर्स बातो बातो में मेरी माँ से कहा “भाभी , भाईसाब तो जोया बिटिया को बहुत प्यार करते थे।लेकिन तुम तो नही करती थी तब माँ ने कहा मेरे तो ये पांच पांच बेटियां थी इसलिये मुझे जोया अच्छी नही लगती ।”सुनकर मन बहुत दुःखी हुवा आँखों मे आँसू आ गए ।मैं तो मेरी जगह एक ही थी ना । उनके पाँच बेटी हुई तो इसमें मेरा क्या कसूर और क्या बेटी होना इतना बड़ा गुनाह हैं कि जन्म देने वाली मां कहती हैं कि मुझे अच्छी नही लगती। आज उनके इसी भेदभाव के कारण वो अपने बेटे बहू से दूर होती चली गई क्योंकि उनके बेटे के भी बेटियां ही है और शायद उनकी संकीर्ण मानसिकता ये स्वीकार नही कर पा रही कि बेटी भी बेटो से कम नही अगर हम उन्हें अच्छी परवरिश और अच्छी शिक्षा दे तो वे भी माँ बाप का नाम रोशन कर सकती हैं। #अंजली धाभाई

         

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