अदृश्य स्याही – कागज दिल

काश कोई ऐसी काग़ज़ दिल सी अदृश्य स्याही हो
नज्मो में तेरा नाम अंकित करूँ और किसी को न दिखाई हो

मेरी गजलें ,नज़्मे ,कविताएँ सब तेरे नाम कऱ दूँ
मैं तो क्या मेरी लिखी किताबे भी बस तुझ संग ब्याही हो

मेरे शब्दों में छुपा हो कोई तो तिलस्म ऐसा
पढ़ के डूबे तो उभर न पाये पाठक ऐसी सागर सी गहराई हो

गठबंधन ऐसा हो मौजूदगी न जरूरी हो हजूम की यहां
तेरी मेरी रज़ा हो और बस खुदा की गवाही हो
खुदा की गवाही हो….
बस खुदा की गवाही हो

काश ऐसी कोई अदृश्य स्याही हो…
काश….
©Soni❤❤……

         

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