आवाज-ए-काग़ज़ दिल

कागज़ दिल पर इस दिल की दरकार लिखेंगे।
नाम लखेंगे अपना तुमको प्यार लिखेंगे।

तुमको पा कर दुनिया पा ली है मैंने।
तुमको अपने जीवन में उपहार लिखेंगे।

रोज़ नए लगते हो रोज़ जुदा सबसे।
नई अदा में हम तुमको अखबार लिखेंगे।

आफताब तुम रातों के शहजादे हो।
तुमको नीले अम्बर का सरकार लिखेंगे।

तुमसे शुरू कहानी मेरे इस दिल की।
इस जीवन का तुमको ही आधार लिखेंगे।

रूह से तुमको चाहा तुमसे प्यार किया।
तन मन का तुमको ही सब अधिकार लिखेंगे।

मैं तुममे खो जाऊँ तेरी हो जाऊँ।
अपना सब कुछ नाम तेरे सौ बार लिखेंगे।

शाम्भवी मिश्रा
कानपुर,यूपी

         

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