तू ही बता कागज़ दिल

” कागज़ दिल ”
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कौन हूँ मैं , क्या हूँ मैं, तु ही बता अ काग़ज़दिल।
किस किस को ये बतलाऊँ , तू ही मेरा काग़जदिल ॥

ना जमीं मेरी , ना आसमाँ मेरा, खुद ही खुद को समझाऊँ ।
रो रहा है कागज़दिल , इस दिल को कैसे मैं सहलाऊँ॥

फूल भी है , बहार भी आई, दिल से मेरे टकरा गई ।
तु ही बता अ जिन्दगी , खफा क्यों मुझसे हो गई ॥

जी सकुँ , ना मर ही सकुँ ,क्यों जीवन से मैं डर रही ।
रास्ता मिल जाये ऐसा, क्यों बेजुबाँ मैं बन रही ॥

एक लहर उठ जाये ऐसी ,खुशी बस जाये मन में कहीं ।
आ जा अब तो मत तरसाना ,खुशी है तु बस मेरी खुशी ॥

– उर्मिल#चित्कला✍

         

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