कागज़ दिल पर लिखती हूँ हर बात

अपने दिल की
बात मैं किस से कहूं।
अब तुम भी तो मेरे
पास नहीं हो,
मुझे तन्हा छोड़
कर चले गये।
आज मैं 
कागज़ दिल पर
लिखती हूं हर  बात 
कागज़ दिल
पर लिख कर
मन हल्का हो
जाता है, लगता है
जैसे
मैं तुम्हें ही सब
लिख रही हूं,
तुम कभी तो
आओ गे और
कागज़ दिल
पर मेरी लिखी हर
बात पढ़ोगे।बस यही

 सोच कर लिखती 

रहती हूं आगर ये 
कागज़ दिल न‌
होता तो मेरा
क्या होता
सोच कर कभी कभी
सिहर उठती हूं मैं।
कागज़ दिल
आज मेरे
सुख दुःख का
साथी है।
जब भी तन्हा 

 उदास 
होती हूं मैं
कागज़ दिल
पर लिखने
लगती हूं
या कागज़ दिल
को पढ़ने लगती हूं।
आज लगता है
मुझे कागज़ दिल से
प्यार हो गया है।
ये कागज़ दिल
मुझे कभी
तुम्हारी तरह छोड़ 

कर नहीं जायेगा।

ये हमेशा मेरा
साथ देगा।

मुझे यकीन है, यकीन।
थैक्स कागज़ दिल।
©अंशु कुमारी

         

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