कागज़ दिल

बन जाता कागज,दिल हर दिलदारों का।
यादें भरी कहानी सुनाता है दो यारों का।

बिछड़ा हुआ दिल ही कागज बन जाता है,
ख्वाब बनकर छप जाता खिले बहारों का॥

कोरे कागज पर शब्दों का हार दिखाता है।
प्रेमी-युगल के दिलों का आवाज़ सुनाता है।

दिल बिछड़ना ही बन जाता कागज दिल,
शब्दों की बाजीगरी से यादों को भूलाता है॥
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________________© जय प्रकाश निराला

         

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