कागज़ दिल

किसी के इन्तजार में कागज़दिल बन बैठा।

शब्द सहारे गम कागज से मिल बन बैठा।

यादगार पल जब जेहन में उतरने लगते हैं,

ख्वाबों में ही चाँद संग मन खिल बन बैठा॥

तेरे आने की चाहत को दिल में बसाये हैं।

हर पल हर क्षण गम की कहानी बनाये है।

मैं यादभरी कहानियां दिल पर लिख डाला,

चाह लिए कागज़दिल,शब्दों से सजायें हैं॥

ख्वाबों-ख्यालों में अक्सर तु ही नजर आती

नजरें मिलाकर मुझसे क्यों दूर चली जाती।

कागज़दिल पर अबतक क्या लिखती रही,

पढा जब उसे इक दिन मन को मेरे भाती॥ _________रमेश कुमार सिंह ‘रुद्र’

         

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