कागज़ दिल है मेरा

यूं ना बिखराओ मुझे कागज़ दिल है मेरा,
इस कागज़ दिल पर कभी तस्वीर बनाते थे मेरा।

वो कागज़ अब कहीं खो गये इन फिजाओं में,,
जो रंग भरते थे कभी इश्क में तेरा मेरा।

आप का साथ न रहा तो दिल की क्या हालत हो गई,
किताबों के पन्नों पर अहसास होता है कभी तेरा।

ये इश्क है जहां उम्मीद होती वहां नहीं मिलता,
दिल रोता है बार बार बस नाम लेकर तेरा।

लडखते कदमों से मधुशाला की ओर जाता हूं,
पीता हूं जाम पर जाम , नजर आता हर ओर चेहरा तेरा।।

डॉ राजमती पोखरना सुराना भीलवाडा राजस्थान

         

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