कागज दिल की बात

*कागज दिल की बात*
हो जाइये कागज दिल , करते कितने आस ।
उड़ चलिये सुदूर गगन,लगते कितने पास ।।

लगते कितने पास ,पतंग बन झूम रहिये ।
मीत मिलते सुवास , सुर सजा झूम गाइये ।।

कागज दिल पर काज,करते अब न शर्मायिये ।।
लिखते मन के राज , सुना कहानी मोहिये ।।
नवीन कुमार तिवारी,,

         

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