कागज दिल बनने दो

दिल में भावनाओं का ज्वार उठने दो
मन में हलचल को हिलोरें लेने दो
जब बस न चले खुद पर……..
बातों को काग़ज़ दिल बनने दो

जब होंठ मंद मंद मुस्कायें
आँखों से खुशियाँ छलक उठें
तब मत रोको खुद को तुम….
भावों को काग़ज़ दिल बनने दो

जब हो जाओ तुम कभी उदास
बीती बातों की यादें आये पास
तब खुद को अकेला न समझो तुम
तब…. काग़ज़ दिल को अपना समझो तुम

_____अर्चना खण्डेलवाल – – – – –

         

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