कागज दिल पे लिखी दास्तां

एक राह चलती हुई
इक कसक ,हमकदम सी
मंज़िल ए तलब की ज़ानिब
सुकूं अभी सफ़र में है

बस इतनी ही है
‘कागज़ दिल’ पे लिखी
दास्तां ए इश्क़ अपनी।

         

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