” रंग दो काग़ज़ दिल प्रिये”

एक “काग़ज दिल”है मेरा
एक तुम्हारा दिल प्रिये
आज हम मिलकर बनाएं
चित्र एक स्वप्निल प्रिये।।
तुम बनाओ बाग़ सुन्दर
मैं सुमन और तितलियाँ
एक सरोवर हो वहाँ
और हों सुनहरी मछलियाँ
चाँदनी छिटके गगन से
व्योम हो झिलमिल प्रिये।।
है यही तुमसे निवेदन
स्वप्न यह साकार कर दो
मेरे एकाकी ह्रदय में
चाहतों के रंग भर दो
तुम उठाकर तूलिका अब
रंग दो ‘काग़ज़ दिल’ प्रिये।।
भरत दीप

         

Share: