कागज़ दिल मुस्कुराये किस तरह

राह चलते गैर को अपना बनाये किस तरह,
हाथ उनसे दोस्ती का हम मिलाए किस तरह।
जिंदगी ने हर कदम पर ठोकरे दी दोस्तों,
ऐसे में कागज़ दिल मुस्कुराये किस तरह।।
साथ दो कदम कोई चलता नहीं ज़माने में,
हमकदम फ़िर उम्र भर का हम बनाये किस तरह।
क्या पता किस मोड़ पर हो जाये कोई हादसा,
जीने की फिर आस लगाए तो लगाए किस तरह।।
दिल टूटा है जब भी किसी को दिल से चाह,
बातें मन की फिर किसी को सुनाए तो सुनाए किस तरह।
कागज़ दिल मेरा टूट टूट कर चूर हो गया है,
सच्चे प्यार का दिल में फिर अहसास जगाये तो जगाये किस तरह।।

         

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