यादों को सजाए -काग़ज़ दिल

गीतिका
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मेरे महबूब तुझे दिल मे बसा लूँ तो चलूँ ।
दिल में इस प्यार की इक शम्मा जला लूँ तो चलूँ ।।

तेरी यादों को सजाये है मेरा काग़ज़दिल
आज एहसास यही घर मे सजा लूँ तो चलूँ ।।

चाँदनी रात में चन्दन की लिये खुशबू हवा
इन फ़िज़ाओं को मैं बाहों में समा लूँ तो चलूँ ।।

एक कश्ती बना दरिया में भे काग़ज़ दिल
इस सफ़ीने को जरा पार लगा लूँ तो चलूँ ।।

मौत हर मोड़ पे आ बैठ गयी धरना दिये
इसके आग़ोश से अब खुद को बचा लूँ तो चलूँ ।।

हादसों ने किया बदहोश इस क़दर है मुझे
एक पल ठहरो जरा होश में आ लूँ तो चलूँ ।।

मेरे ख्वाबों में तेरे इश्क़ की खुशबू है जगी
ये महक साँसों में अब अपनी बसा लूँ तो चलूँ ।।
—————————–डॉ. रंजना वर्मा

         

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