काग़ज़ दिल

  1. काग़ज़दिल कोरा रहा, कोरा मन का ग्राम।
    कोरा कोरा दिन गया , कोरी कोरी शाम।।
    कैसे कह दूँ रामजी , काग़ज़दिल बेकार।
    आज नहीं तो कल पिया,लिख जाएँगे प्यार।।
    ●अमित कुमार दुबे
         

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