काग़ज़ दिल

ये हम को बतलाए कोई काग़ज़दिल
कब बनता है, क्यूँ बनता है काग़ज़दिल
जब नज़रों का भाव क़लम बन जाता है
तब बनता है’ताज’ सनम का काग़ज़दिल
– मुनव्वर अली ताज

         

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