जुस्तजू ए काग़ज़ दिल

चाँद तारों को लिए निशा होले से आ गई,
जुस्तजू दिल की थी तुम्हारी अदा भा गई !
वक्त़ ने पहरे लगाऐ थे काग़ज़दिल पर कभी ,
पर रोशनी प्यार की यूं आँखों में समा गई !!

कामनी गुप्ता ***
जम्मू !

         

Share: