दर्द पुराना काग़ज़ दिल पे

कैसे कह दूँ कुछ न लिखा है मेरे कागज दिल पे|
लिखकरके इक नाम मिटा है मेरे कागज दिल पे|
कैसे कह दूँ कुछ न लिखा है ——
++
ख्वाब नुकीला कभी सजा है मेरे कागज दिल पे|
यूँ ही ना येे   जख्म  हुआ है मेरे  कागज दिल पे|
कैसे कह दूँ कुछ न लिखा है —–
++
खूब वफाएं याद हैं मुझको चाँद से उस चैहरे की,
वही अभी तक साफ दिखा है मेरे कागज दिल पे|
कैसे कह दूँ कुछ न लिखा है ——-
++
जब जब चलती है पुरवाई दर्द पुराना उठता है ,
पर यादों की रखी दवा है मेरे कागज दिल पे|
कैसे कह दूँ कुछ न लिखा है —-
++
गुजर गये बचपन के वो दिन बिछड़ गये सब साथी,
हर लम्हा पर अब भी रुका है मेरे कागज दिल पे||
कैसे कह दूँ कुछ न लिखा है मेरे कागज दिल पे||

         

Share: