नाजुक होता काग़ज़ दिल

रहें सभी से हम हिल मिल ।
दिल को करें नहीं धूमिल ।।
कभी नहीं आधात करें ,
नाजुक होता कागज दिल ।।
सब पर प्यार बहायें हम ।
सबको गले लगायें हम ।।
सबका हम सम्मान करें ,
निर्मल होता कागज दिल ।।
नाजुक होता कागज दिल ।।
मात – पिता का मान करें ।
जन जन का उत्थान करें ।।
धर्म – जाति पर लड़े नहीं ,
तोड़े नहीं किसी का दिल ।।
नाजुक होता कागज दिल ।।
पग पग आगे बढ़ता चल ।
बिना रुके तू चलता चल ।।
साहस से सब कुछ मिलता ,
खुद चल आ जाती मंजिल ।।
नाजुक होता कागज दिल ।।

         

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