याद – काग़ज़ दिल

मेरी तनहाइयाँ भी अब कागज़ दिल की तरह गुनगुनाने लगी हैं,
हाथों की चूडियाँ कुछ बताने लगी हैं,
ये खनक है शायद उनके आने की,
जिनकी याद में ,मैं अब कागज़ दिल की तरह मुस्कुराने लगी हैैं
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