रफ्तार कागज़ दिल

हमारी धड़कनों की बन गया रफ्तार कागज़ दिल
क़लम के हम दीवानों का नया घरबार कागज़ दिल

सुनें दिल की कहें दिल की शगुन की शुभ घड़ी लाया
करेगा हर ज़ुंबा का आज से इज़हार कागज़ दिल

अभी गुमनाम हैं तो कल तलक़ मशहूर भी होंगे
हमें शायद बना डाले कभी अख़बार कागज़ दिल

ग़ज़ल हो गीतिका या छंद या फिर नज़्म हो कोई
भिगोकर प्रीत से अपनी करे श्रृंगार कागज़ दिल

न चाँदी का न सोने का न हीरे का न मोती का
अनोखी शब्दमणियों का खुला भंडार कागज़ दिल
दीक्षा सारस्वत बावरी

         

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