हुक्म-ए-इलाही – काग़ज़ दिल

तनिक तुम देर से ही प्यार करने आज आकर मिल।
मिलन में प्यार से कर ले सनम इज़हार कागज दिल॥

लिखित में चाहिए मुझको सभी उदगार खत बालम।
नहीं हो फासला दिल से कभी भी प्यार में जानम॥
ज़रा सी बात पे नाराज होकर यार मत बन सिल।
मिलन में प्यार से कर ले सनम इज़हार कागज दिल॥

जुबाँ पर नाम तेरा हो हृदय से बात तेरा हो।
सनम हरदम मगर दिल में सिफ़त जज़बात तेरा हो॥
हवा पर लिख रहा फरियाद दिल का इश्क में मैं खिल।
मिलन में प्यार से कर ले सनम इज़हार कागज दिल॥

हमें हुक्म-ए-इलाही है तुझी से प्यार करने का।
मुहब्बत में सनम तेरीे गली में रोज मरने का॥
खुदा भी देख कर इस इश्क को जाने रहा क्यों हिल?
मिलन में प्यार से कर ले सनम इज़हार कागज दिल॥

तुम्हारे पैर का पायल बना दिल इश्क़ में खानम।
तुम्हारे संग रहने को तरसता दिल, कसम जानम॥
लगा फटने सुर्ख लब रंगीन पैबंद आकर सिल।
मिलन में प्यार से कर ले सनम इज़हार कागज दिल॥

©-राजन-सिंह

         

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