क़ाग़ज दिल – जीवन है

ज़र्रे -ज़र्रे में जीवन है
बोलो किसमें जान नहीं।

क्यों कहते हो इस दुनिया का
कोई भी भगवान नहीं।

दिल,दिल है या काग़ज़ दिल जो
हर्फे – उल्फ़त मिटा रहे।

रूहानी स्याही का मिटना
इतना भी आसान नहीं।।

शुभा शुक्ला मिश्रा ‘अधर’

         

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