आलीशान कफ़स में मुर्दा जिंदगी

रात कब रुकी है जो आज रुक जाएगी
सुबह आने से पहले चली कल जाएगी

पलकों पर नज़र आ रहा ताजमहल ख्वाबों का सभी के
आँख खुलते ही जिंदगी फिर मकबरे में बदल जाएगी
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युवराज अमित प्रताप 77
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