चेहरे पे चेहरा

रोज नया चेहरा बनाता हूँ ,कुम्हार की तरह।

फिर चेहरे पे चेहरा लगाता हूँ ,कलाकार की तरह।

और आइने से नजरें चुराता हूँ ,गुनहगार की तरह।

कभी बाजार में बिक जाता हूँ ,व्यापार की तरह।

किसी अजनबी को गुहार लगाता हूँ, दिलदार की तरह।

मेरे चेहरे से चेहरा उतारो मददगार की तरह।

         

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