जबसे लगा मैँ लिखने ,दर्द हमदर्द लगा दिखने

कलम से दर्द का रिश्ता सबसे करीबी कहलाता है
दर्द कलम को वह बताता जो सबसे छिपाता है

खुशी दिखाने को तो बड़े बड़े जश्न हैं मनते
मौजूद हो कर भी महफ़िल में दर्द सामने नहीं आता है

खुशी में डूब इंसान खुद ही झूमता गाता है
क्या खुशी का बिना लिखे नज़र नहीं आता है

युवराज अमित प्रताप 77
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