जल जाओगे

सूरते मोम किसी रोज पिघल जाओगे
इस तरह आग से खेलोगे तो जल जाओगे

मान्ता हूँ कि मिरी जात है इक शम्मा-ए- हकीर
तुम भी सूरज हो मगर शाम को ढल जाओगे

         

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