ज़हर बेचते हैं

क़ज़ा बेचते हैं क़हर बेचते हैं
सरेआम, शाम -ओ -सहर बेचते है
जो दौलत को अपना ख़ुदा मानते हैं
दवा के वरक़ में ज़हर बेचते हैं
भरत दीप

         

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