तलब

दौलत की तलब और ना हुकूमत की तलब है
दुनिया से मुझे सिर्फ मुहब्बत की तलब है

सूरत तो हजारों हैँ हसीं साद जहां में
सूरत की नहीं मुझको तो सीरत की तलब है

अरशद साद

         

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