” दर्द से रिश्ता जो पुराना है “

किसका इंसान तू दिवाना है छोड़ सब कुछ यहाँ से जाना है ….. पाँव माँ बाप के दबा ले कभी मिलता मुश्किल से ये ख़जाना है …. मर चुका हूँ मै यार अंदर से साँस लेना फ़क़त बहाना है ……. मेरे अशआर ख़ास ही होंगे रिश्ता ए दर्द जो पुराना है … यूँ बना ले महल तू कितने भी क़ब्र आखिर तेरा ठिकाना है ….. ज़ख्म मेरे कुरेद कर वो कहें और कितना नमक लगाना है …… पंकजोम ” प्रेम “

         

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