“नहीं कोई मलाल रहे”…

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ज़िंदगी एक ज़ंग है तेवर को अभी बरक़रार रखो ,
मुश्किलों का समाधान बस दो पल में नज़र आयेगा ।
जो हारता है वो बाद में अंततः जीतता भी है ,
ज़ख़्म मिलेगा तो  वो भी धीरे-धीरे भर जायेगा ।।
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पल-पल ज़िंदगी में साँसों की कीमत समझ तो लो यार ,
हरेक ख़्वाहिश कर लो पूरा , नहीं कोई मलाल रहे ।
कौन कमबख्त रोक पाएगा हमारी उम्मीदों को ,
बस पाने की ललक हमारे साथ में बहरहाल रहे ।।
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कहाँ तक चलोगे आखिर किनारे-किनारे ऐ राही ,
लहरों को आज़माने कभी न कभी तो जाना होगा ।
क्या मज़ा है चुपचाप जाकर आँख बंद कर जीने में ,
मज़ा चाहिए तो एक भँवर में जाकर आना होगा ।।
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सभी से बरोबर मिलते-जुलते रहा करो ऐ “कृष्णा”,
न जाने कौन-सी मुलाक़ात यहाँ आखिरी होगी ?
ज़िंदगी आज जी लो वरना इक दिन ऐसा आएगा कि ,
अपने कार्यक्रम में ही अपनी ग़ैर-हाज़िरी होगी ।।
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— °•K.S. PATEL•°
( 22/06/2018 )

         

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