यादें साथ उम्रभर का

ठहर चुके लम्हों से सवाल किया जाता नहीं
है मालूम शाम का परिंदा मुड़कर आता नहीं

यादों के शहर ने बनाया हम में आशियाँ अपना
कोई बाशिंदा अपना घर छोड़ तो जाता नहीं

★वन्दना ★
…. ©️

         

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