रहनुमा कब तक बनोगे

रहनुमा कब तक बनोगे तुम हमारी जी़स्त के,
छोड़ दो तन्हा कि खुद को आजमा कर देख लें।
दाव पर ही जब लगा दी हमने अपनी जिन्दगी,
आज तूफानों में अपना घर बना कर देख लें।
—-राजश्री—–

         

Share: