ज़हर पीकर मौत को ठगते हैं

नहीं मलनी अब पलकें, सपनों की भी एक हद होती है
भूल जाता धड़कते में दिल,दिल की भी सरहद होती है

आओ ज़हर पीकर थोड़ा, अब मौत को ठगते हैं
लोगों के मरने की वज़ह तो आजकल शहद होती है
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युवराज अमित प्रताप 77

         

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