निगाहें

निगाहें अक्सर मचल जाती है, जब तेरी नजरों से मिल जाती हैं।
निगाहें बेसब्र हो जाती हैं, जब वो जुल्फें चेहरे से हटाती हैं।
निगाहें गैर हो जाती हैं, जब उनकी आंखों से टकराती हैं।
निगाहें कातिल बन जाती हैं, जब वो दिल में उतर जाती हैं।।

         

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