मंज़र

 

अपने अन्दर हैं समेटे जो तबाही मन्जर
हम को हैं आज वही देते दिखाई मन्जर

हर तरफ खून से मासूम के लिपटी लाशें
देख कर दिल बहुत देता है दुहाई मन्जर

अरशद साद रूदौलवी

         

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