मजलिस

नाबीना होने का नाटक करते हैं
सहते हैं सौ ज़ुल्म मगर चुप रहते है
दुनिया ऐसे ही लोगों की मजलिस है
हम जैसे कुछ लोग ख़सारा सहते हैं
भरत दीप

नाबीना=दृष्टि हीन
मजलिस =सभा
ख़सारा= नुकसान

         

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