अंधेरा घना हो रहा है

अंधेरा ये कैसा घना हो रहा है
अजब बेबसी का गुमाँ हो रहा है ।

कई वक़्त बीते थे बनने में जिनके
इश्क़ का फसाना फना हो रहा है ।।

जिसे देख चेहरे पे खिलती हँसी थी
आज मिलते ही मन अनमना हो रहा है ।।

स्वराक्षी स्वरा

         

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