अब मिले शाख कोई

क्यों नम मौसम ही मेरे मकान में रहता है
उसका ही ख्याल क्यों आसमान में रहता है

कभी तो आराम मिले मेरी धड़कनों को भी
हर वक्त तो नहीं  परिंदा  उड़ान  में रहता है

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… युवराज अमित प्रताप 77
..  दर्द भरी शायरी – .कता

         

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