और … इश्क़ मर गया

खामोशी ही पसरी रही दोनों के दरमियाँ
बेजुबां इश्क़ करहाता रहा , बस एक सदा के लिए

लम्हों में लगी थी घुलने आदत , खुद में रह पाने की
मोहब्बत समेट लाई अपने निशां, अफसाने में कदा के लिए

सदा – आवाज़
कदा – स्थान
अफ़साना – कहानी
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युवराज अमित प्रताप 77
.. दर्द भरी शायरी

         

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